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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, मेलबर्न द्वारा भव्य विलक्षण योग एवं ध्यान शिविर का आयोजन

टारगेट पोस्ट, मेलबर्न।

12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, मेलबर्न द्वारा मेल्टन कम्यूनिटी हॉल, विक्टोरिया में एक-दिवसीय विलक्षण योग व ध्यान शिविर का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें विशेष रूप से संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य योगाचार्य स्वामी डॉक्टर सर्वेश्वर जी ने भारत से ऑनलाइन माध्यम द्वारा जुड़कर उपस्थित प्रतिभागियों को योग व ध्यान के टिप्स प्रदान किए।

स्वामी जी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि
योग संस्कृत की ‘युज्’ धातु से निकला है, जिसका अर्थ है ‘जुड़ना’। योग का अर्थ है स्वयं की आत्मा से जुड़ना। जो ‘स्व’ में स्थित है, वो ही तो स्वस्थ है और जो स्वस्थ है वो ही तो मस्त है। समग्र रूप से कहा जाए तो योग तन को आरोग्य युक्त, मन को तनावमुक्त और आत्मा को पुष्ट रखने का नाम है।
इसी अवधारणा का अनुसरण करते हुए स्वामी जी ने उपस्थित लोगों को अत्यंत सरल किन्तु प्रभावशाली योगासन जैसे ताड़ासन,तिर्यक ताड़ासन, त्रिकोणासन, कटिचक्रासन, मण्डूकासन, सुप्त-वज्रासन इत्यादि सिखाकर कमर दर्द, डायबिटीज, हर्निया, माइग्रेन, सिर दर्द, व सर्वाइकल जैसे रोगों से निज़ात पाने की विधियाँ प्रदान कीं।

उसके बाद सभी को सूर्य-नमस्कार का अभ्यास करवाकर बारह आसनों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। प्राणायाम यौगिक विधियों के तहत नाड़ीशोधन, कपालभाति, सूर्यभेदी, भस्त्रिका व भ्रामरी प्राणायाम सिखाया गया। स्वामी जी ने बताया कि नाड़ीशोधन प्राणायाम एकमात्र ऐसा प्राणायाम है जिसको करने से शरीर की समस्त 72,000 नाड़ियों का शुद्धिकरण एक ही बार में हो जाता है। हमारा नर्वस सिस्टम दुरुस्त होता है और त्वचा सम्बन्धी समस्त रोगों से निज़ात मिलता है। भ्रामरी प्राणायाम के सम्बन्ध में स्वामी जी ने बताया कि इससे हाइपरटेंशन, माइग्रेन, कम स्मरण शक्ति जैसी अनेक बीमारियों का निदान संभव है।

ध्यान-विधियों पर विस्तृत चर्चा करते हुए स्वामी जी ने बताया कि ध्यान केवल बाहरी आँखों को बंद कर लेना भर नहीं है, अपितु भृकुटि के बीच दिव्य नेत्र का खुल जाना ही ध्यान है। केवल कुछ श्वास-विधियों को सीखना ध्यान नहीं है। वास्तविक ध्यान तो उस ज्योति स्वरूप आत्मा का दर्शन अपने भीतर ही प्राप्त कर लेना है। जब समय के पूर्ण सद्गुरु हमारे मस्तक पर हाथ रखते हैं तो तत्क्षण ही वो हमारे भीतर उस परम प्रकाश स्वरूप ईश्वर को प्रकट कर देते हैं। उस दिव्य प्रकाश का दर्शन करने के उपरांत ध्यान अपने आप ही भृकुटि बीच स्थित हो जाता है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ध्यान की यहीं शाश्वत विधि आज समाज को प्रदान कर रहा है।

इस अवसर पर सभी ने विश्व-शांति की मंगल-कामना से युक्त हो सामूहिक ध्यान भी किया। सभी लोगों ने बढ़-चढ़ कर इस योग शिविर में हिस्सा लिया और विभिन्न यौगिक विधियों को सीखकर उन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर विधायक स्टीव मेघई, डाक्टर सर्वेश्वर ,दिलशेर सिंह, प्रमोद तोमर , गुरप्रीत कौर,रिक्की व अन्य मौजूद रहे।औ

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