टारगेट पोस्ट, बटाला
बटाला शहर एक ऐतिहासिक शहर है। एक समय था जब इस शहर में पंजाबी के उच्च कोटि के उस्ताद शायर थे। महाकवि शान्त, बरकत राम युमन, गोपाल दास गोपाल, मेला राम तायर, कंस राज गुहर । इनमें सबसे प्रसिद्ध बरकत राम युमन थे। पंजाब से बाहर भी पूरे भारत में जहाँ जहाँ पंजाबी बसे हुए हैं वहाँ वहाँ युमन को कवि दरबारों में विशशेष रूप से बुलाया जाता था। इसी शहर के बुज़ुर्ग शायर उस्ताद युमन का एक शागिर्द शिव बटालवी भी था । आज बटाला शहर की पहचान शायरी के बादशाह माने जाते शिव कुमार बटालवी से है। भारत के साथ-साथ विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग शिव कुमार बटालवी की कविताओं , शायरी के आज भी दीवाने हैं। महज 19 साल की उम्र में शिवकुमार बटालवी ने शायरी में अपनी पहचान बनानी शुरु कर ली थी और अपने शहर का नाम रोशन करने लगा था। 36 वर्ष की अल्पायु में उसका देहांत हो गया था।

वहीं, आज हम बात करेंगे शिव कुमार बटालवी को फर्श से अर्श तक ले जाने वाले उनके उस्ताद पंडित बरकत राम युमन की। बरकत राम युमन का जन्म आज के पाकिस्तान के ज़िला सियालकोट में 26 जनवरी 1905 को हुआ। देश के विभाजन के बाद बटाला शहर में अपना जीवन व्यतीत किया। शुरू से ही कविताओं शायरी और गीतों से देश विदेश में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाकर बटाला का नाम रोशन किया था। पूरे भारत भर में उनके शागिर्द थे। उन पर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने एक पुस्तक भी प्रकाशित की थी ” बरकत राम युमन: जीवन अते रचना”।
जब शिव कुमार 15 वर्ष का था, तब उस्ताद युमन की शागिर्दी में आ गया था । जब शिव 19 वर्ष की उम्र का था, उस्ताद युमन अपने शागिर्द शिव को कवि दरबारों में ले जाने लगे। शिव को भारत के अन्य राज्यों में भी साथ लेकर गए। मुम्बई भी साथ लेकर गए जहाँ उसे बलराज साहनी से मिलवाया। शिव को कवि दरबारों में ले जाकर उस होनहार की शायरी में निखार आने लगा। युमन ने शिव को लोगों के समक्ष पेश कर उसे कवियों की दुनिया का चहेता कवि बना दिया।
वहीं, बात करें बटाला के शहर की , तो अकाली भाजपा सरकार राज में शिव बटालवी ऑडिटोरियम तो बनाया गया लेकिन अफ़सोस बुद्धिजीवियों की समझ शिव कुमार बटालवी के गुरु बरकत राम युमन को क्यों सम्मान नहीं दे पाई? युमन को “पंजाबी साहित्य सूरज” के खिताब से नवाजा गया था। शिव एक चन्द्रमा था जो पंजाबी साहित्य के सूरज युमन के आलोक में रोशन हुआ था।
बरकत राम युमन के पोते सुभाष शर्मा बटालवी ( मोबाइल नंबर 9582617190 ) नई दिल्ली में रहते हैं, निकट भविष्य में अपने दादा जी की लिखी ग़ज़लों और रुबाईयों का संग्रह प्रकाशित कर रहे हैं। पुस्तक में युमन के लिखे और उन पर अन्य द्वारा लिखे लेख भी सम्मिलित हैं।
