बटाला (आदर्श तुली/ सुमित नारंग /चेतन शर्मा /सुनील युम्मन/ अनमोल शर्मा)
भारतीय मूल के पारंपरिक खेल कबड्डी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने और इसे अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में अशोक दास लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी जगत में अपनी सक्रिय भूमिका के चलते उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों को कबड्डी के एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

अशोक दास इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन (IKF) के सीईओ (Chief Executive Officer), इंग्लैंड कबड्डी एसोसिएशन के फाउंडर, यूरोपियन कबड्डी फेडरेशन के प्रेसिडेंट तथा IKF के फाउंडिंग मेंबर हैं। उनके नेतृत्व और प्रयासों से कबड्डी को भारत की सीमाओं से बाहर ले जाकर दुनिया के अलग-अलग देशों में लोकप्रिय बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

बताया गया है कि वर्तमान में लगभग 80 देश इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन के सदस्य हैं। इतने बड़े स्तर पर विभिन्न देशों को कबड्डी के लिए एकजुट करना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय मूल के इस खेल की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
अशोक दास का मुख्य उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग देशों को एक टीम और एक मंच के रूप में जोड़कर कबड्डी को एक विश्व स्तरीय खेल के रूप में स्थापित करना है। उनका मानना है कि कबड्डी भारत की समृद्ध खेल विरासत का हिस्सा है और इसे दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति एवं खेल प्रतिभा के प्रतिनिधि के रूप में मजबूती से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में कबड्डी की नई शुरुआत
कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय सफर में वर्ष 2030 को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत के अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में कबड्डी के शामिल होने की संभावना से इस खेल को एक बड़ा वैश्विक मंच मिल सकता है। इससे कबड्डी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और खेल को दुनिया के अन्य देशों में भी और अधिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

अशोक दास के प्रयासों का उद्देश्य केवल कबड्डी को लोकप्रिय बनाना ही नहीं, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना और युवा प्रतिभाओं के लिए नए अवसर पैदा करना भी है। उनका मानना है कि यदि विभिन्न देशों को एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय कबड्डी ढांचे के अंतर्गत जोड़ा जाए तो भारतीय मूल के इस खेल को दुनिया के प्रमुख खेलों की श्रेणी में स्थापित किया जा सकता है।
कबड्डी आज भारत से निकलकर एशिया, यूरोप और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में अपनी पहचान बना रही है। प्रो कबड्डी लीग की लोकप्रियता ने भी इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अशोक दास का विजन स्पष्ट है—भारतीय मूल के कबड्डी खेल को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना, अधिक से अधिक देशों को इसके साथ जोड़ना और भारतीय खिलाड़ियों को ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना, जहां वे अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में भारत का नाम रोशन कर सकें।
