भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के गर्भ गृह स्थल पर किया गया था कब्जा ,मस्जिद हटाकर मंदिर निर्माण कराने तक जारी रहेगा संघर्ष: महेंद्र प्रताप
मथुरा (मनोज चौधरी)
भांडीरवन में आयोजित धार्मिक सभा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे को लेकर जनसमर्थन जुटाने का मंच बन गई। कार्यक्रम में पहुंचे हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जन्मभूमि के वास्तविक गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण कराना है।
उन्होंने कहा कि देश की दिशा तभी बदलेगी जब धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाएं सशक्त होंगी। जन्मभूमि प्रकरण को केवल अदालत तक सीमित न रखते हुए समाज तक ले जाने के उद्देश्य से जनसंवाद अभियान चलाया जा रहा है। “चलो गांव की ओर” और “श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ज्योति यात्रा” के माध्यम से लोगों से संपर्क कर समर्थन जुटाया जा रहा है, जिसका विस्तार देश से बाहर भी ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और अमेरिका तक पहुंच चुका है।
सभा में मौजूद लोगों से जब पूछा गया कि कौन-कौन जन्मभूमि स्थल के दर्शन कर चुका है तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाकर प्रतिक्रिया दी। वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विभिन्न आक्रमणकारियों के समय मंदिर ध्वंस के प्रमाण मिलते हैं तथा परकोटे की दीवारों पर आज भी धार्मिक प्रतीक चिन्ह दिखाई देते हैं। उन्होंने पुरातत्व सर्वे की मांग दोहराते हुए कहा कि वैज्ञानिक जांच से तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।
महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उपलब्ध ऐतिहासिक आधारों पर 23 दिसंबर 2020 को न्यायालय में वाद दायर किया गया था, जिसके बाद शुरू हुआ कानूनी संघर्ष अब व्यापक जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण तक शांतिपूर्ण अभियान जारी रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों से वास्तविक गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण के समर्थन में राय ली गई, जिस पर सभी ने हाथ उठाकर सहमति जताई और “आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी” के जयघोष लगाए। श्रद्धालुओं को मंदिर निर्माण में सहयोग और सनातन परंपरा की रक्षा का संकल्प भी दिलाया गया।
सभा में संत श्यामानंद जी महाराज, चैतन्य सर्वेश दास जी महाराज, लवकुश दास, सोनू पंडित, मनोज ठाकुर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।