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श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद: साधु संत निकलेंगे मठों से, जेन जी का करेंगे मार्गदर्शन महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को मिलेगी डिजिटल धार, तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड

 

मथुरा (मनोज चौधरी/ पंडित लक्ष्मीकांत शर्मा)

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में अब नई पीढ़ी को सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है। साधु-संत मठों और आश्रमों से निकलकर युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे, जबकि Gen Z आंदोलन की डिजिटल और युवा शक्ति के रूप में इसकी गतिविधियों को नई दिशा देगी। इस पूरे अभियान का नेतृत्व श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद केस के हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट करेंगे।

पिछले दिनों वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम में Gen Z को आंदोलन से जोड़ने के बाद अब इसके अगले चरण की रूपरेखा तैयार की जा रही है। न्यास की योजना है कि साधु-संतों के मार्गदर्शन में युवाओं को इतिहास, शोध, दस्तावेजीकरण और आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ा जाए। इसके माध्यम से आंदोलन को केवल जनजागरण तक सीमित न रखकर ऐतिहासिक सामग्री के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और डिजिटल प्रसार की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

न्यास की ओर से ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि डिजिटल अभिलेखागार (रिकॉर्ड)’ तैयार करने की भी योजना है। इसमें जन्मभूमि से संबंधित उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेज, ग्रंथ, मानचित्र, राजस्व अभिलेख, न्यायालयों के आदेश, पुराने समाचार प्रकाशन, तस्वीरें और अन्य सामग्री को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में उपलब्ध सामग्री को भी तलाशकर अभिलेखागार से जोड़ने की योजना है।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट के अनुसार जन्मभूमि से संबंधित सामग्री विभिन्न पुस्तकालयों, धार्मिक संस्थाओं, शोधकर्ताओं और निजी संग्रहों में उपलब्ध हो सकती है। ऐसे स्रोतों की जानकारी जुटाकर दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां तैयार की जाएंगी। प्रत्येक सामग्री के साथ उसके स्रोत, संदर्भ और उपलब्ध प्रमाणों का विवरण दर्ज करने का प्रयास होगा, ताकि भविष्य में शोधार्थियों को अध्ययन के लिए सामग्री व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो सके।

साधु-संत होंगे मार्गदर्शक, Gen Z संभालेगी डिजिटल कमान

आंदोलन के इस नए चरण में साधु-संतों की भूमिका मार्गदर्शक की होगी और Gen Z की भूमिका डिजिटल दस्तावेजीकरण, शोध एवं जनजागरण की। संत समाज युवाओं को धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों की जानकारी देगा, वहीं युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उपलब्ध सामग्री को व्यवस्थित कर व्यापक समाज तक पहुंचाने का काम करेंगे।

Gen Z के स्वयंसेवकों को दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, वर्गीकरण, रिकॉर्ड तैयार करने और डिजिटल सामग्री विकसित करने से जोड़े जाने की योजना है। सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये प्रमाणित स्रोतों और संदर्भों के साथ सामग्री को देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों में बसे भारतीय और हिंदू समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

इतिहास को दस्तावेजों के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी

न्यास के अनुसार इतिहास स्मरण के लिए पाठ्य सामग्री भी तैयार की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं, उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों, मंदिर पर हुए आक्रमणों, जजिया कर तथा मूल गर्भगृह स्थल से जुड़े ऐतिहासिक दावों आदि को संबंधित स्रोतों और संदर्भों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास होगा।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट का कहना है कि मौखिक परंपराओं और भावनात्मक दावों के साथ-साथ उपलब्ध दस्तावेजों और स्रोतों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित करना आवश्यक है। उनका कहना है कि डिजिटल अभिलेखागार आने वाली पीढ़ियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी आधार बन सकता है।

उन्होंने कहा, “Gen Z को आंदोलन से जोड़ने का उद्देश्य केवल युवाओं की संख्या बढ़ाना नहीं है। हमारा प्रयास है कि नई पीढ़ी साधु-संतों के मार्गदर्शन में इतिहास, शोध और आधुनिक डिजिटल तकनीक से जुड़े। आंदोलन की डिजिटल और युवा गतिविधियों का नेतृत्व किया जाएगा और उपलब्ध दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।”

न्यास अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि अब तक आंदोलन में कानूनी संघर्ष, जनजागरण, यात्राओं और संत समाज को जोड़ने जैसे विभिन्न चरण सामने आए हैं। 26 अगस्त को वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम के बाद Gen Z को आंदोलन की नई शक्ति के रूप में जोड़ने की दिशा तय की गई है। अब साधु-संतों के मार्गदर्शन और Gen Z की डिजिटल क्षमता के समन्वय से आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान में दिशा और मार्गदर्शन संत समाज से तथा नेतृत्व और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी युवाओं के साथ मिलकर उनके नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। उद्देश्य यह है कि जन्मभूमि से संबंधित उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित, व्यवस्थित और संदर्भ सहित डिजिटल माध्यमों से व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सके।

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