टारगेट पोस्ट,फ़तेहगढ़ चूड़ियां:
अपनी ही सरज़मीं पर बेगाने हुए कश्मीरी पंडितों के निर्वासन और उस अमानवीय त्रासदी को आज 37 वर्ष बीत चुके हैं। विडंबना यह है कि दशकों बाद भी वक्त की सरकारों की चुप्पी पीड़ितों के न्याय के साथ एक क्रूर मजाक साबित हो रही है। इन तीखे विचारों का प्रकटावा ब्राह्मण सभा फ़तेहगढ़ चूड़ियां के पदाधिकारियों ने आज एक विशेष बैठक के दौरान किया।
बैठक को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि 1990 का वो घाव आज भी हरा है।

सरकारों ने केवल चुनावी वादे किए, लेकिन कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित घर वापसी और उनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस रोडमैप तैयार नहीं किया। सभा ने मांग की कि कश्मीरी नरसंहार की निष्पक्ष जांच के लिए एक “न्यायिक आयोग” का गठन किया जाए।
इस अवसर पर संदीप शर्मा (अध्यक्ष), रोहित शर्मा (महासचिव), नरेश बावा, कुलदीप शर्मा, राजेश कालिया, भूषण जोशी और हरि जोशी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक कश्मीरी पंडितों को न्याय और सम्मान नहीं मिलता, ब्राह्मण सभा इस आवाज को बुलंद करती रहेगी।
