मेल्टन (आजाद शर्मा)
दिव्य गुरु सर्वश्री आशुतोष जी महाराज जी (संस्थापक एवं प्रमुख, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान) की असीम कृपा से, मेल्टन कम्युनिटी सेंटर रंगों, भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा, जब डीजेजेएस ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 का भव्य और आध्यात्मिक उत्सव मनाया।

कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और दिव्य लीलाओं पर आधारित मनमोहक नाट्य प्रस्तुति, पारंपरिक भारतीय नृत्य, तथा हृदय को छू लेने वाला आध्यात्मिक प्रवचन शामिल थे। आयोजन का समापन सामूहिक श्रीकृष्ण आरती और महाप्रसाद के साथ हुआ, जिसे सभी ने प्रेम और एकता के भाव से ग्रहण किया।

विशेष आकर्षणों में बच्चों और किशोरों के लिए फैंसी ड्रेस शो, अनूठी गतिविधि “कान्हा संग रक्षाबंधन”, और बारीकी से निर्मित गोकुल गाँव मॉडल शामिल थे, जिसने आगंतुकों को श्रीकृष्ण के बाल्यकाल के गांव की अनुभूति कराई।

इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए स्टीव मैकगी एमपी (कैबिनेट सचिव एवं मेल्टन क्षेत्र के विक्टोरियन विधान सभा सदस्य), जूली शैनन (काउंसलर, स्ट्रिंगिबार्क वार्ड, मेल्टन सिटी काउंसिल), तथा शिवाली चैटली (काउंसलर, एक्सडेल वार्ड, सिटी ऑफ ग्रेटर बेंडिगो), ब्राह्मण सभा ऑस्ट्रेलिया को अध्यक्ष चंद्र शर्मा उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह सांस्कृतिक विरासत को संजोने, सामुदायिक बंधन मजबूत करने और आध्यात्मिक चेतना को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण है।

इस कार्यक्रम को विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, मीडिया भागीदारों और गौरवशाली प्रायोजकों के साथ-साथ अनेक सामुदायिक सदस्यों के समर्थन से और भी विशेष बनाया गया।

वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्रेम और भक्ति के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने रासलीला के प्रसंग, गोपियों संग उनकी लीलाएं, माखन चुराने की घटना, तथा एक उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने जैसे प्रसंग सुनाए। साथ ही इन लीलाओं के आध्यात्मिक अर्थ भी समझाए। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण को जगतगुरु कहा जाता है – अर्थात समस्त ब्रह्मांड के गुरु – और उनके प्रत्येक कर्म में मानवता के लिए एक गहन संदेश निहित है।

डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि परमात्मा के प्रत्यक्ष अनुभव का जीवन-परिवर्तनकारी प्रभाव ब्रह्मज्ञान के माध्यम से पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु द्वारा प्राप्त होता है, जो मानव जन्म का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इस अनंत विज्ञान के द्वारा, जब मनुष्य अपने भीतर कृष्ण चेतना का अनुभव करता है, तो वह उस दिव्य शक्ति से परिचित होता है जो हमारे अस्तित्व का आधार है।
