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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से संबंधित विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शनिवार को मथुरा में विशेष लोक अदालत (सुलहवार्ता) के तहत सुनवाई हुई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-11) सुरेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में हिंदू पक्ष के वादी उपस्थित हुए, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई पक्षकार उपस्थित नहीं हुआ।

 

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा विकास कुमार के निर्देशन में सर्वोच्च न्यायालय के “समाधान समारोह-2026” के अंतर्गत यह सुलहवार्ता आयोजित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार 21, 22 और 23 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत से पूर्व लंबित मामलों में आपसी सहमति से समाधान की संभावनाएं तलाशने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर सुलह बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दोनों पक्षों को समझौते की संभावना पर विचार के लिए लोक अदालत में उपस्थित होना था। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष के वादी निर्धारित समय पर उपस्थित हुए और लगभग आधे घंटे तक अपना पक्ष रखा, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, हिंदू पक्षकारों ने सुलहवार्ता के दौरान प्रस्ताव रखा कि यदि मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल से अपना ढांचा हटाकर अपना दावा छोड़ देता है तो मस्जिद निर्माण के लिए अन्य उपयुक्त स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसी भी ढांचे को सुरक्षित रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया।
महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि न्यायालय ने हिंदू पक्ष की बात सुनी तथा आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए। अब इस संबंध में आगे की प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष चलेगी। उन्होंने कहा कि यदि मथुरा स्तर पर कोई समाधान नहीं निकलता है तो सर्वोच्च न्यायालय में 21, 22 अथवा 23 अगस्त को सूचीबद्ध तिथि पर मामले की आगे सुनवाई हो सकती है।
प्रकरण के अन्य हिंदू पक्षकारों ने भी कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल से अपना दावा और ढांचा हटा लेता है तो मस्जिद निर्माण के लिए अन्य स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि हिंदू पक्ष विवादित स्थल को भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल मानता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी जानकारी के अनुसार शनिवार को गठित पीठों के समक्ष चिन्हित मामलों में सुलहवार्ता आयोजित की गई। बैठकों में पीठ के सदस्यों के साथ सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा श्रीमती अनीता सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने संबंधित पक्षों को आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान के लिए प्रेरित किया।
सुलहवार्ता के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार, कौशल किशोर ठाकुर जी महाराज, संत श्यामानंद जी महाराज, अजय सिंह, विजय बहादुर सिंह सहित हिंदू पक्ष के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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