वृंदावन (मनोज चौधरी)
वृंदावन के कुंभ क्षेत्र स्थित सुदामा कुटी में आयोजित शताब्दी महोत्सव 2026 के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से उठा। नाभा पीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुतीक्ष्ण जी महाराज के सानिध्य में हुए इस आयोजन में संत, विद्वान और श्रद्धालुओं की बड़ी सहभागिता रही।
महोत्सव को संबोधित करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिंदू पक्षकार एवं न्यास अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति आस्था का विषय होने के साथ-साथ ऐतिहासिक सत्य और विधिसम्मत अधिकार का प्रश्न है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मुगल आक्रांताओं द्वारा किए गए बार-बार के आक्रमण, मंदिर विध्वंस, लूट और जजिया कर जैसे अत्याचारों के ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित किया।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, वही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल है और इस संबंध में उनके पास ठोस व प्रामाणिक साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि लगभग ढाई एकड़ भूमि को लेकर दाखिल किया गया वाद सबसे पहले स्वीकार किया गया है और यह मामला उच्च न्यायालय में पूरी तरह विधिसम्मत तरीके से लड़ा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सत्य और न्याय के पक्ष में है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालयी प्रक्रिया के साथ जन-जन में जागरण और समर्थन आवश्यक है, ताकि सांस्कृतिक आस्था से जुड़े इस विषय का समाधान संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का मार्ग कानून और तथ्यों पर आधारित रहेगा।
महोत्सव को संबोधित करते हुए सेवा मंगलम के महंत एवं विद्वान गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है, जब उसके मंदिर और मठ सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का विषय केवल एक स्थल का नहीं, बल्कि हिंदू समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, जिसके लिए समाज को संगठित और सजग रहना होगा।
कार्यक्रम में संत श्यामानंद जी महाराज की उपस्थिति रही, जिनका मंच से सम्मान किया गया। सुदामा कुटी शताब्दी महोत्सव के मंच से उठी यह आवाज एक बार फिर संकेत देती है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का प्रश्न अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है,
