टारगेट पोस्ट, मेलबर्न।
साहित्य संध्या (Q), साहित्य संध्या ( West) तथा हिन्दी शिक्षा संघ के सहयोग से मेलबर्न स्थित भारत के प्रधान कॉनसलावास में विश्व हिन्दी दिवस 2026, शनिवार 10 जनवरी को उत्साह के साथ मनाया गया|

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ इस अवसर पर सुश्री प्राची गैनधर की सुंदर सरस्वती वंदना से हुआ | भारत के प्रधान कॉनसुल डा. सुशील कुमार ने अपने मेलबोर्न मे कार्यकाल समाप्त होने के कुछ ही पहले यह उत्सव मनाया | उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री का इस अवसर पर संदेश पढ़कर सुनाया | उन्होंने मेलबोर्न में हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए साहित्य संध्या और हिन्दी शक्षा संघ की सराहना की तथा मेलबोर्न मे बसे भारतीय समुदाय की प्रशंसा की तथा विशेष रूप से हिन्दी शिक्षा संघ के अध्यक्ष एवं साहित्य संध्या के आयोजक डा. सुभाष शर्मा के हिन्दी सेवा के लिए योगदान का उल्लेख किया | डा शर्मा पिछले 25 वर्षों से भी अधिक समय से हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं |

मेलबोर्न में हर माह हिन्दी काव्य गोष्ठी का आयोजन, साहित्य संध्या (क्यू) और साहित्य संध्या (वेस्ट) के नाम से आयोजन होता है | साहित्य संध्या वेस्ट टारनेट में प्रशांत टंडन के संरक्षण में पुनः आरंभ हो गयी है |
इस आयोजन में जाने माने 3 विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया | पहले हिन्दी के विद्वान डा. पीटर फ़्रेड लैंडर उपस्थित थे उन्होंने हिन्दी के प्रचार प्रसार से जुड़े कुछ सुझाव दिए साथ ही विक्टोरिया राज्य हिन्दी के विकास पर प्रकाश डाला |

दूसरे विशिष्ट अतिथि ऑस्ट्रेलिया के प्रोफ. अर्नोल्ड डिक्स जिन्होंने उत्तराखंड की टनल में फंसे 41 लोगों को सुरक्षित निकाला और उनकी जान बचाई और ख्याति अर्जित की| उन्होंने भारत से जुड़े अपने आध्यात्मिक अनुभवों का वर्णन किया कि कैसे उन्हे अपने मिशन को पूरा करने में पुजारियों और देवी देवताओं का आशीर्वाद और सहयोग मिला। उन्होंने अपने संस्कृत के प्रति प्रेम को संस्कृत बोल कर दर्शाया और लोगों को अपने हिन्दी और संस्कृत से प्रेम से चकित किया |

तीसरे हिंदी के जाने माने विद्वान लेखक एवं कवि भारत से पधारे डा. वेद व्यथित ने भाषा जिन संकटों से गुजर रही है उसका आंकलन किया। तत्पश्चात डा सुभाष शर्मा ने अपने अभिभाषण में सभी प्रवासी भारतीयों से अपील की कि भारतीय मूल के लोग हिन्दी को संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग करें, यदि हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने में अड़चने आरही हैं तो आइए हम प्रवासी प्रयास करें की हिन्दी विश्व की प्रतिष्ठित भाषा बने| हिन्दी सीखें और सिखाएं, जो भाषा बोली जाती है वह कभी मारती नहीं है |

कार्यक्रम में बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम बहुत रोचक रहा जिसमे नृत्य और नाटिकाओं के माध्यम से हिंदी के प्रति जागरूकता दिखाई गई। इसमें वी एस एल के विद्यार्थी एवं उनकी शिक्षकाएं आदेश चौहान तथा अपर्णा कुमार जी का अद्वितीय योगदान रहा। एक हिंदी भाषा की उपेक्षा पर शिक्षाप्रद सुंदर नाटिका योगेश भट्ट के अपने विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुति भी इसी सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनी।

एक प्रश्नोत्तरी द्वारा हिन्दी के ज्ञान को जांचने के लिए कनिष्ठ और वरिष्ठ दो वर्गों में प्रतियोगिता आयोजित की गई और दोनों वर्गों के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया | एक कविता पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन इन्ही दो वर्गों में ही किया गया जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी अपनी कविता सुनाई और विजेताओं को पुरस्कार दिए गए| तत्पश्चात कुछ वरिष्ठ कवियों ने अपनी रचनाएं विभिन्न रसों में प्रस्तुत की| कनिष्ठ सहभागियों को प्रमाणपत्र तथा वोजेताओं को पुरस्कार डा. सुशील कुमार जी ने तथा चांसरी के प्रमुख श्री तेज कृष्ण जी ने वितरित किए | तेज कृष्ण जी ने एक हास्य कविता सुनाकर श्रोताओं का मन मुग्ध कर दिया |
कार्यक्रम के अंत में डा. वेद व्यथित की पुस्तक ” अहिल्या” का विमोचन डा. सुशील कुमार प्रधान कॉन्सुल तथा डा सुभाष शर्मा के कर कमलों द्वारा हुआ | और अंत योगेश भट्ट जी का विवेकानंद जी को समर्पित एक देश प्रेम से ओतप्रोत गीत का विमोचन गीत के वीडियो दर्शा कर डा सुशील कुमार ने ही किया | अंत में श्री नरेश शर्मा ने बाँसुरी पर अनेकों कर्णप्रिय धुने बजाकर जाते जाते लोगों का मन मोह लिया| कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रिया शुक्ला ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया | कार्यक्रम का आयोजन काउंसलेट की ओर से सुश्री तान्या चौहान ने बहुत ही सुनियोजित सुचारु रूप से किया जो सभी ने सराहा|
साहित्य संध्या वेस्ट के संरक्षक श्री प्रशांत टंडन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की|
